सुस्वागतम्

समवेत स्वर पर पधारने हेतु आपका तह-ए-दिल से आभार। आपकी उपस्थिति हमारा उत्साहवर्धन करती है, कृपया अपनी बहुमूल्य टिप्पणी अवश्य दर्ज़ करें। -- नीलम शर्मा 'अंशु

23 अगस्त 2009

अगस्त के एक ही हफ्ते में कोलकाता में
रेलवे के दो महत्वपूर्ण कदम

(क) हेरिटेज स्पेशल :
16 अगस्त को कोलकाता की जनता को सुखद आश्चर्य की अनुभूति हुई । 155 वर्ष पूर्व 15 अगस्त 1854 को हावड़ा से हुगली (क़रीब 24 मील) तक स्टीम इंजन से चलने वाली रेल चलाई गई थी । पूर्व रेलवे की 155 वीं वर्षगाँठ के अवसर पर उसी स्टीम इंजन से हेरिटेज स्पेशल ट्रेन (17 बोगियों वाली) हावड़ा से बंडेल के लिए चलाई गई । उपस्थित सभी ने रेल मंत्री की इस पहल की सराहना की । यह भी घोषणा की गई कि विशेष अवसरों पर इस हेरिटेज ट्रेन को चलाया जाएगा । यह इंजन सुबह के 11 बजकर 50 मिनट पर हावड़ा स्टेशन के न्यू कॉम्पलेक्स के 22 नंबर प्लेटफार्म से रवाना हुआ तथा 27 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से इसने ढाई घंटों में बंडेल का सफ़र तय किया । विभिन्न मंत्रियो, अतिथियों एवं पत्रकारों समेत 500 से अधिक यात्रियों ने इस ट्रेन का लुत्फ उठाया। रवानगी के वक्त आर. पी. एफ. बैंड भी बजाया गया । रवानगी से पूर्व उद्घाटन समारोह में केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण राज्य मंत्री गुरुदास कामत, केन्द्रीय रेलवे राज्य मंत्री ई. अहमद, केन्द्रीय जहाजरानी राज्य मंत्री मुकुल राय ने लोगों को संबोधित किया । इस मौके पर रेलवे के महाप्रबंधक दीपक कृष्ण, हावड़ा के डी. आर. एम. मु. जमशेद, रेलवे बोर्ड के सचिव ए. मित्तल सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे । इस मौके़ पर स्टेशन परिसर में पूर्व रेलवे के विरासत सहायक द्वारा रेलवे संबंधी डाक टिकटों की प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया । रेलवे की विभिन्न उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए श्री अहमद ने हावड़ा मुंबई, दिल्ली, चेन्नई सहित चार रेलवे स्टेशन भवनों पर आधारित डाक टिकटों का भी लोकार्पण किया । श्री गुरुदास कामत ने रेलवे से संबंधित डाक टिकटों पर आधारित पुस्तक का लोकार्पण भी किया । इस दौरान आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम में डॉ. पल्लव कीर्तनिया ने अपने गायन से सबका मन मोह लिया।

ख) मेट्रो रेलवे का विस्तार :
रेलमंत्री सुश्री ममता बंद्योपाध्याय ने 22 अगस्त शनिवार को टालीगंज ( बांग्ला फिल्मों के नायक के नाम पर अब नया नाम महानायक उत्तम कुमार) स्टेशन से गड़िया (कवि नजरूल) स्टेशन तक मेट्रो रेल सेवा के विस्तार का शुभारंभ किया । वर्ष 1999 में तत्कालीन रेल मंत्री सुश्री बंद्योपाध्याय ने ही आठ किलोमीटर के विस्तार परियोजना की घोषणा की थी । रेलमंत्री, राज्यपाल डॉ. गोपाल कृष्ण गांधी, व वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी ने संयुक्त रूप से हजारों लोगों और विभिन्न कलाकारों तथा गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में हरी झंडी दिखाकर ट्रेन को गड़िया के लिए रवाना किया । लोगों ने नि:शुल्क सवारी का लुत्फ़ उठाया । इस मौके पर दक्षिणेश्वर, बजबज, बैरकपुर, डायमंड हार्बर, राजारहाट आदि तक मेट्रो के विस्तार संबंधी प्रस्ताव की जानकारी भी दी गई ।
उल्लेखनीय है कि मात्र आठ किलोमीटर के विस्तार कार्य को अमली जामा पहनाने में नौ वर्ष का समय लग गया । कोलकाता मेट्रो लगभग 25 साल पुरानी है । 29 दिसंबर 1972 को प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 16.74 कि. मी. के विस्तार की आधारशिला रखी थी तथा वास्तविक रूप से संरचना कार्य 1978 में शुरू हुआ । मेट्रो की प्रथम सेवा एसप्लानेड से भवानीपुर(अब नेताजी भवन) के बीच(तीन कि.मी.) 1984 में आरंभ हुई । फिर इसका विस्तार टालीगंज तक हुआ और टालीगंज से दमदम (यानी उत्तरी कोलकाता और दक्षिणी कोलकाता के बीच) 1995 में शुरू हुई । मेट्रो की अधिकतम गति 55 कि. मी. प्रति घंटा तथा न्यूनतम गति 30 कि.मी. प्रति घंटा है । प्रत्येक कोच में 48 यात्रियों के बैठने और 278 यात्रियों के खड़े होने की व्यवस्था है । पूरी ट्रेन की वहन क्षमता लगभग 2356 यात्री हैं । आज से यह दमदम से कवि नजरूल स्टेशन की 22.45 कि. मी. की दूरी 41 मिनटों में तय करेगी । दिल्ली में इसके काफ़ी बाद मट्रो कार्य शुरू हुआ और विस्तार तथा विकास की गति सराहनीय है । दिल्ली मेट्रो की सवारी करके सचमुच अहसास होता है कि आप किसी विदेशी शहर में घूम रहे हैं । महानायक उत्तम कुमार का निधन 1980 में हुआ और मेट्रो उसके पांच-छह वर्ष बाद शुरू हुई परंतु उनके नाम पर स्टेशन का नामकरण करने में इतने बरस लग गए । विस्तार सेवा के नए स्टेशनों के नाम क्रमश: मास्टर दा सूर्य सेन, काजी नजरूल इस्लाम, गीतांजलि, नेताजी सुभाष जैसी हस्तियों के नाम पर रखे गए हैं । अब बात करें किराए की, तो पांच किलोमीटर तक चार रुपए, पांच से दस कि.मी. के लिए छह रुपए, दस से पंद्रह कि.मी. के लिए आठ रुपए और पंद्रह से बीस कि.मी. के लिए बारह रुपए निर्धारित किए गए हैं । ख़ैर, बसों, टैक्सियों के मुकाबले मेट्रो की सवारी की मज़ा ही अलग है । समय की बचत बहुत होती है । आप किसी को दिए गए समयानुसार गंतव्य पर पहुंच सकते हैं । हाँ, इन दिनों मेट्रो में खुदकुशी की प्रवणता भी काफ़ी बढ़ी है क्योंकि जब तक चालक को अहसास हो पाता है और वह ब्रेक लगाए तब तक कई बोगियां शरीर के ऊपर से गुज़र चुकी होती हैं । खुदकुशी की इन घटनाओं पर अंकुश लगना आवश्यक है । आदमी खुद तो चलता बनता है, अपने घर-परिवार के बारे में भूल कर वह अपनी व्यक्तिगत तकलीफ़ को इतना महत्वपूर्ण समझ लेता है कि सब कुछ ताक पर रखकर जान दे देने को आतुर हो जाता है और ऐसा भयानक कदम उठा लेता है । इन घटनाओं के चलते लगभग घंटे भर तक तो यातायात सामान्य नहीं हो पाता । ऐसी ही एक घटना के मौके़ पर मेट्रो सेवा ठप्प थी और मुझे आकाशवाणी एफ. एम. पर लाईव शो पेश करने पहुंचना था तो किसी तरह गिरते-प़ड़ते टैक्सी पकड़ जाम की समस्या से जूझते हुए शो शुरू होने से सात-आठ मिनट पहले पहुंच पाई । मेट्रो के जहां इतने फ़ायदे हैं वहीं यह उसका दुखद पहलू है । इस दिशा में मेट्रो प्रशासन को दुरुस्त क़दम उठाने होंगे ।
प्रस्तुति – नीलम शर्मा ‘अंशु’( 23-08-2009)

1 टिप्पणी:

  1. Just install Add-Hindi widget button on your blog. Then u can easily submit your pages to all top Hindi Social bookmarking and networking sites.

    Hindi bookmarking and social networking sites gives more visitors and great traffic to your blog.

    Click here for Install Add-Hindi widget

    उत्तर देंहटाएं